Sahsi William Tell : Lok-Katha (Switzerland)

Switzerland Folktales in Hindi – स्विट्ज़रलैंड की लोक-कथा

साहसी विलियम टेल : स्विट्ज़रलैंड की लोक-कथा
पुराने ज़माने में गेसलर नाम का एक दुष्ट राजा था। उसने स्विट्ज़रलैंड पर बहुत साल राज किया। गेसलर की बड़ी सेना थी। सैनिकों की मदद से वो प्रजा पर अत्याचार और जुल्म करता था।

गेसलर ने बीच बाजार में अपनी टोपी को एक ऊंचे बांस से लटकवाया। उसके पास उसने दो सैनिक तैनात किए। गेसलर लोगों को अपनी ताकत दिखाना चाहता था। उसने एक नया कानून बनाया। अब सब लोगों को बाजार में से गुज़रते समय गेसलर की टोपी के सामने झुकना ज़रूरी था।

विलियम टेल एक शिकारी था। वो बाजार में जानवरों की खालें बेचता था। उसे गेसलर का यह कानून बिल्कुल पसंद नहीं आया। “गेसलर लोगों के साथ गुलामों जैसा सलूक कर रहा है!” उसने अपने परिवार से कहा। “स्विस लोगों को गेसलर की टोपी के सामने बिल्कुल नहीं झुकना चाहिए। उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए।”

अगले दिन विलियम टेल अपने बेटे के साथ बाजार गया। वहां उन्होंने पहले जानवरों की खालें बेचीं। फिर उन्होंने घर के लिए कुछ ज़रूरी सामान खरीदा।

फिर विलियम टेल और उसके बेटे को, बाजार में गेसलर की टोपी के सामने से गुज़रना पड़ा। पर वे टोपी देखकर झुके नहीं। उससे सैनिक बहुत नाराज़ हुए। उन्होंने विलियम टेल और उसके बेटे से टोपी के सामने झुकने को कहा। पर फिर भी वे झुके नहीं।

उसके बाद सैनिक, विलियम टेल और उसके बेटे को पकड़कर गेसलर के पास ले गए। “मैं तुम्हें अपने जिंदगी बचाने का एक मौका दूंगा,” दुष्ट गेसलर ने विलियम से कहा। “तुम्हारे बेटे के सिर पर एक सेब रखा जाएगा और वो दूर खड़ा होगा। तुम्हें दूर से सेब पर तीर से निशाना लगाकर उसे गिराना होगा।”

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“मैं अपने लड़के की जान खतरे में डालने की बजाए खुद मरना पसंद करूंगा!” विलियम टेल ने कहा। “अगर तुम इस चुनौती को स्वीकार नहीं करोगे, तो तुम्हारे बेटे को मार डाला जायेगा,” गेसलर चिल्लाया।

फिर दो सैनिकों ने विलियम टेल के बेटे को पकड़ा। वो उसे सौ फीट दूर एक पेड़ के पास ले गए। विलियम टेल ने कमान और दो तीर मांगे। उसे बहुत डर लग रहा था। उसने प्रार्थना की कि उसके हाथ न कांपें। चारों तरफ एकदम सन्नाटा था। विलियम टेल ने पूरे ध्यान से निशाना साधा। फिर उसने कमान से तीर छोड़ा।

तेज़ी से हवा को चीरता हुआ तीर आगे बढ़ा। वो सीधा सेब से टकराया। सेब दो टुकड़ों में फट गया। “अब विलियम टेल और उसका बेटा सुरक्षित हैं!” लोगों की भीड़ चिल्लाई। गेसलर को छोड़ बाकी सभी लोग बहुत खुश थे।

“तुम्हारा प्रदर्शन बुरा नहीं था,” गेसलर ने बेरुखी से कहा। “पर उसके लिए तुम्हें दो तीर क्यों चाहिए थे?” “अगर मेरा पहला निशाना चूकता तो दूसरा तीर आपके कलेजे के आरपार होता!” विलियम टेल चिल्लाया।

यह सुनकर गेसलर का चेहरा पीला पड़ गया। उसने तुरंत सैनिकों को बुलाया। “तुम ज़िंदा रहोगे, विलियम टेल,” गेसलर ने कहा। “पर जेल की काली कोठरी में। वहां तुम्हें तीर-कमान की ज़रुरत नहीं पड़ेगी!”

उसके बाद विलियम टेल को एक एक छोटी नाव में बैठाया गया। जब गेसलर के सैनिक उसे जेल ले जा रहे थे, तभी एक भयानक तूफान आया। तूफान में नाव डगमगाने लगी। सिर्फ साहसी विलियम टेल ही नाव को किनारे तक ला पाया। उसने सैनिकों को भी बचाया। फिर किनारे आकर विलियम टेल ज़मीन पर कूदा। अब वो पूरी तरह आज़ाद था!

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अब विलियम टेल, गेसलर से घृणा करने लगा था। बाकी प्रजा भी गेसलर के अत्याचारों से तंग आ चुकी थी। एक दिन गेसलर अपने सैनिकों के साथ पहाड़ी पर घूमने जा रहा था। विलियम टेल वहां झाड़ियों में पहले से जाकर छिप गया था। जब गेसलर उसके सामने से गुज़रा तब विलियम टेल ने उसे अपने तीर से मार डाला।

विलियम टेल एक हीरो था। उसने अपने देश स्विट्ज़रलैंड को गेसलर के अत्याचार से बचाया। इसलिए आज भी लोग विलियम टेल की बहादुरी को याद करते हैं। स्विट्ज़रलैंड के लोगों ने विलियम टेल के सम्मान में जगह-जगह पुतले बनाए हैं।

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