सुराही का जिन्न

Panchatantra Stories in Hindi – By Vishnu Sharma

एक गरीब मछुआरा बहुत परिश्रम कर के अपनी रोज़ी रोटी कमाता था। वह एक दिन में केवल चार बार समुद्र में जाल डाल कर मछ्ली पकड़ने के नियम पर चलता था। अपने उस नियम के कारण उसे कई बार घर पर खाली हाथ लौट आना पड़ता था। मछुवाराे की पत्नी भी अपने पति के इस नियम से परेशान थी।

रोज़ की तरह एक दिन मछुआरा अपना जाल ले कर समुद्र पर जा पहुंचा। उसने अपने नियमानुसार पहली बार जाल समुद्र में फेंका और थोड़ी देर बाद उसे पानी से ऊपर खींचा। उसने देखा की जाल में कंकड़ पत्थर और भुरभुरी हड्डियाँ फसी हुई थीं।

मछुआरे नें फिर प्रयास किया इस बार उसे कचरे से भरा हुआ एक ज़ंग खाया बक्सा मिला जिसकी कीमत कुछ भी नहीं थी।

तीसरी बार मछुआरे नें जब समुद्र में अपना जाल डाला तब उसे फिर से नाकामी हाथ लगी। अब मछुआरे की हिम्मत जवाब दे चुकी थी। वह आसमान की और निराशा भरी निगाहों से देखने लगा और अपनी बुरी किस्मत को कोसने लगा।

कुछ देर बात खुद को हिम्मत देते हुए उसने चौथी और आखरी बार अपना जाल समुद्र में फेंका।

इस बार जब उसने अपना जाल समुद्र से ऊपर खींचा तो उसने देखा की उसके जाल में कोई मछ्ली तो नहीं फसी पर एक बड़ी सी पीतल की प्राचीन सुराही फंसी थी। उसने जल्दी से उस सुराही को अपने थैले में भर लिया और अपना जाल समेट कर घर चला गया।

खाली हाथ लौटने पर हेमशा की तरह उसे थोड़ी देर अपनी पत्नी की जली-कटी बातें सुननी पड़ी\ उसके बाद वह चुपचाप अपने कमरे में चला गया और सुराही को देखने लगा। उत्सुकता वश जैसे ही उसने उस सुराही का ढक्कन खोला तो उसमें से धुंवा बाहर आने लगा और पल भर में एक विशाल काय जिन्न उसके सामने आ खड़ा हुआ।

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सुराही से बाहर निकलते ही जिन्न बोला-

स्वामी, मैं आपका सेवक हूँ…आप जो कहेंगे मैं करूँगा लेकिन याद रखिये मैं कभी खाली नहीं बैठ सकता…यदि आप मुझे कोई काम नहीं बता पाए तो मैं फ़ौरन आपका वध कर दूंगा और हेमशा-हेमशा के लिए आज़ाद हो जाऊँगा।

मछुवारा बोला, “जाओ मेरे परिवार के लिए श्रेष्ठ भोजन की व्यवस्था करो!”

और पलक झपकते ही मायावी जिन्न उसके समक्ष स्वादिष्ट भोजन का ढेर लगा देता है।

मछुवारा घबरा जाता है कि इतनी जिन्न ने इतनी जल्दी ये काम कैसे कर दिया?

इस बार वह उसे बड़ा काम देता है, “जाओ मेरे रहने के लिए एक आलिशान महल तैयार करो!”

अभी मछुवारा ठीक से अपना आदेश देता भी नहीं है कि जिन्न वहां एक आलिशान महल खड़ा कर देता है।मछुवारा अब और भी घबरा जाता है उसे समझ ही नहीं आता कि जिन्न को ऐसा कौन सा काम दे जिसमे वो उलझा रहे।

उधर जिन्न मछुवाराे के सर पर खड़ा चीखता है, ” बताओ अब क्या करना है?”

तभी मछुवाराे को एक तरकीब सूझती है वह मुस्कुराते हुए कहता है, “जाओ महल के बीचो-बीच एक लम्बा -मोटा बांस गाड़ दो।”हो गया।” ,जिन्न बोलता है।

बहुत अच्छे अब जाओ उस बांस पे बार-बार चढ़ो-उतरो और जब तक मैं दोबारा नहीं बुलाता तब तक मत आना!

जिन्न मुंह लटकाया चला गया और मछुवारा अपने परिवार के साथ आराम से उस महल में रहने लगा।

Moral of the story: बुद्धि से बड़ी से बड़ी समस्या को सुलझाया जा सकता है।

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