मनहूस पेड़

Bedtime Stories in Hindi

बहुत वर्षों की मेहनत के बाद एक किसान ने एक सुन्दर बागीचा बनाया। बागीचे के बीचो-बीच एक बड़ा सा पेड़ था जिसकी छाँव में बैठकर सुकून का अनुभव होता था।

एक दिन किसान का पड़ोसी आया, बागीचा देखते ही उसने कहा, ” अरे क्या तुम नहीं जानते, इस प्रजाति के पेड़ मनहूस माने जाते हैं, ये जहाँ होते हैं, वहां अपने साथ दुर्भाग्य लाते हैं। इस पेड़ को जल्दी से जल्दी यहाँ से हटाओ।” पडोसी बोला।

यह बोलकर पडोसी तो चला गया पर किसान परेशान हो गया। उसे डर लगने लगा कि कहीं इस पेड़ की वजह से उसके साथ कुछ अशुभ न हो जाए। अगले ही दिन उसने वो पेड़ काट डाला। पेड़ बड़ा था, उसकी कटी लकड़ियाँ पूरे बागीचे में जहाँ -तहाँ इकठ्ठा हो गयीं।

अगले दिन फिर वही पड़ोसी आया और बोला, “इतने सुन्दर बागीचे में ये बेकार की लकड़ियाँ क्यों इकठ्ठा कर रखी हैं। ऐसा करो इन्हे मेरे अहाते में रखवा दो।” लकड़ियाँ रखवा दी गयीं। किसान ने पडोसी की बातों में आकर पेड़ तो कटवा दिया, पर अब उसे एहसास होने लगा कि पडोसी ने लकड़ियों की लालच में आकर उससे ऐसा करवा दिया।

दुखी मन से वह एक साधु के पास पहुंचा और पूरी बात बता दी। साधु महाराज मुस्कुराते हुए बोले, “तुम्हारे पड़ोसी ने सच ही तो कहा था, वो पेड़ वास्तव में मनहूस था, तभी तो वो तुम्हारे जैसे मूर्ख के बागीचे में लगा था।” यह सुन किसान का मन और भी भारी हो गया। “अच्छी बात ये है कि तुम अब पहले जैसे मूर्ख नहीं रहे। तुमने पेड़ तो गँवा दिया पर उसके बदले में एक कीमती सबक सीख लिया है। जब तक तुम्हारी अपनी समझ किसी बात को ना स्वीकारे तब तक दुसरे की सलाह पर कोई कदम मत उठाना।”

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