देवता अब भी

Anonymous Poems in Hindi – अज्ञेय रचना संचयन कविताएँ

देवता अब भी
जलहरी को घेरे बैठे हैं
पर जलहरी में पानी सूख गया है।
देवता भी धीरे-धीरे
सूख रहे हैं
उनका पानी
मर रहा है।
यूप-यष्टियाँ
रेती में दबती जा रही हैं
रेत की चादर-ढँकी अर्थी में बँधे
महाकाल की छाती पर
काल चढ़ बैठा है।
मर रहे हैं नगर-
नगरों में
मरु-थर-
मरु-थरों में
जलहरी में
पानी सूख गया है

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