दादी की होशियारी

Bedtime Stories in Hindi

मनु अपने दादा-दादी और अपने परिवार के साथ शहर में रहता था। मनु अपने दादा-दादी से बहुत प्यार करता था। मनु का बर्थडे आनेवाला था और दादी जी उसे साइकिल गिफ्ट देना चाहती थी। दादी ने अपने बटुए में रुपए गिनकर देखे तो तीन हजार रुपये कम पड रहे थे।

उसके पास ए टी एम कार्ड तो था नहीं कि झटपट जाकर पैसे निकाल लेती और अगर वह घर के किसी दूसरे सदस्य को भेजती है तो बर्थडे गिफ्ट का सरप्राइस फिर सरप्राइस नहीं रह जाता, यह सोचकर दादी जी अपना अपने आप खुद धीरे-धीरे बैक पहुंच गई।

बैंक में बहुत भीड़ थी और लंबी लंबी लाइन लगी थी। दादी जी लाइन में जाकर खड़ी हो गई। काफी देर के बाद जब उनका नंबर आया तो काउंटर पर बैठी लडकी को उसने तीन हजार रुपए निकालने के लिए चेक जमा किया।

बैंक में काम कर रही लड़की ने चेक को देखा और झल्लाकर वापस दादी के हाथों में थमाते हुए बोली, “अरे आप लोग छोटी छोटी रकम निकालने के लिए हमें क्यों परेशान करती हैं, देखती नहीं, कितनी लंबी लाइन है। जाइये, एटीएम से पैसे निकाल लीजिए।”

इसपर दादी ने कहा, “बेटी मेरे पास एटीएम कार्ड नहीं है और मुझे सिर्फ तीन हजार रुपयों की ही जरूरत है।” लेकिन लड़की बूढ़ी दादी की कोई बात सुनने को राजी नहीं हुई और बड़ी कठोरता से जवाब देते हुए बोली, “इतनी छोटी रकम देने के लिए मैं खाली नहीं बैठी हूँ। आप हटिया यहां से, दूसरे को काउंटर पर आने दीजिये।”

See also  Roopa Ki Chaturai: Lok-Katha (Manipur)

बूढ़ी दादी ने तब दो पल सोचा और फिर तुरंत चेक बुक निकालते हुए कहा, “ठीक है बेटी, मुझे मेरे अकाउंट में जमा चालीस हज़ार रुपये पूरे के पूरे अभी निकाल कर दो।” लड़की ने चुपचाप चालीस हजार दादी को पकड़ा दिए।

दादी ने उसमें से तीन हजार रुपए अपने बेग में रखें और बाकी सैंतीस हजार उस लडकी को वापस देते हुए बोली, “जब छोटी रकम मांगा तो तुमने नहीं दिया, जब कि मुझे पता है कि कोई भी बैंक किसी भी सीनियर सिटीजन को इन बातों के लिए मना नहीं कर सकती है। अब कम से कम यह सैंतीस हजार रुपए वापस जमा करने के लिए मना तो नहीं करोगी ना?”

काउंटर पर बैठी लड़की ने शर्म से सर झुकाते हुए “सॉरी मैम” कहा और दादी के बचे हुए सैंतीस हज़ार बैंक में जमा कर दिए।

Leave a Reply 0

Your email address will not be published. Required fields are marked *